Author : Sourabh Jain
हिमाचल प्रदेश और पंजाब की सीमा पर स्थित मोड़ा टोल प्लाजा मंगलवार को किसानों के प्रदर्शन का केंद्र बना रहा। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर बड़ी संख्या में किसान यहां एकत्र हुए और निर्धारित समय तक टोल प्लाजा को टोल मुक्त रखते हुए सभी छोटे-बड़े वाहनों को बिना किसी शुल्क के गुजरने दिया। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किया गया, लेकिन किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के प्रति नाराजगी भी खुलकर जाहिर की। प्रदर्शन के दौरान टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहन चालकों को किसी प्रकार का टोल शुल्क नहीं देना पड़ा। किसानों का कहना था कि यह विरोध किसानों के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने कहा कि कृषि और भूमि से जुड़े फैसलों पर किसानों की राय को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसान आंदोलन, संयुक्त किसान मोर्चा, मोड़ा टोल प्लाजा, पंजाब सरकार, Toll Plaza जैसे विषय प्रमुख रूप से चर्चा में रहे।
प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार संबंधी मुद्दों और पंजाब सरकार की भूमि से जुड़ी नीतियों पर अपनी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि किसानों के हितों को प्रभावित करने वाले किसी भी निर्णय से पहले किसान संगठनों से व्यापक स्तर पर चर्चा की जानी चाहिए। किसान नेताओं ने कहा कि कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों की सहमति के बिना लिए गए फैसले भविष्य में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं। उन्होंने सरकार से ऐसी नीतियां बनाने की मांग की जो किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में सहायक हों।
किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह प्रदर्शन प्रतीकात्मक रूप से आयोजित किया गया है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में भी इसी प्रकार के आंदोलन किए जा सकते हैं। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और प्रशासन से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। वहीं स्थानीय प्रशासन ने भी पूरे कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखी। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद टोल प्लाजा पर सामान्य रूप से टोल वसूली फिर से शुरू कर दी गई।
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