Author : Prem Sagar
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की तीर्थन घाटी में इस वर्ष प्राचीन मुखौटा उत्सव फागली बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ तीन दिनों तक मनाया गया। इस उत्सव में पेखड़ी समेत कई गांवों में आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से आए पर्यटक उत्सव का आनंद लेने पहुंचे।
उत्सव में लकड़ी के पारंपरिक मुखौटे पहनकर स्थानीय लोग देव-नृत्य करते हैं और नाटी प्रस्तुत करते हैं। मान्यता है कि यह नृत्य गांव से नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है और सुख-समृद्धि की कामना करता है। ग्रामीणों और दर्शकों की भागीदारी से यह उत्सव और भी जीवंत बन गया।
आईआईटी मंडी के प्रोफेसर सूर्य प्रकाश ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक “लिविंग म्यूजियम” है, जहां सदियों पुरानी संस्कृति आज भी जीवंत रूप में देखने को मिलती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे हिमाचल के दूरदराज क्षेत्रों की संस्कृति को जानें, समझें और इसकी सुरक्षा में योगदान दें।
इस पारंपरिक उत्सव ने न केवल हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत को उजागर किया, बल्कि देश और विदेश से आए पर्यटकों के लिए भी यादगार अनुभव प्रदान किया। मुखौटा नृत्य और नाटी के माध्यम से स्थानीय कला और संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का प्रयास भी सफल रहा।
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