Post by : Himachal Bureau
नई दिल्ली में किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की मौजूदगी में छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने परियोजना से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते को ऊपरी यमुना क्षेत्र में जल संसाधनों के उपयोग, सिंचाई, पेयजल और नदी के प्रवाह से जुड़े मुद्दों पर राज्यों के बीच सहमति के रूप में देखा जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य उपलब्ध जल का बेहतर प्रबंधन करने के साथ विभिन्न राज्यों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल संसाधन विकसित करना है।
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना लंबे समय से संबंधित राज्यों के बीच सहमति और विभिन्न प्रक्रियाओं के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थी। जून 2026 में नई दिल्ली में हुई बैठक में छह राज्यों के बीच परियोजना को लागू करने के लिए समझौता ज्ञापन पर सहमति बनी थी। अब सितंबर में राज्यों ने परियोजना से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। परियोजना से जुड़े समझौते में केंद्र सरकार और भागीदार राज्यों की वित्तीय भागीदारी को लेकर भी व्यवस्था तय की गई है। जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि बाकी 10 प्रतिशत वित्तीय भार छह राज्यों द्वारा साझा किया जाएगा।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार किशाऊ परियोजना के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा के साथ बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट गुरुत्व बांध बनाया जाएगा। परियोजना में लगभग 1,562 मिलियन घन मीटर जल भंडारण की क्षमता प्रस्तावित है। परियोजना का असर केवल जल भंडारण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके माध्यम से करीब 97,000 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने और लगभग 1,476 मिलियन इकाई जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
किशाऊ परियोजना को Yamuna River से भी सीधे जोड़ा जा रहा है। परियोजना के जरिए जल भंडारण और नियंत्रित जल प्रबंधन से यमुना में पानी के प्रवाह को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार की ओर से जून में हुई बैठक के बाद कहा गया था कि परियोजना से यमुना में स्वच्छ जल के प्रवाह को बढ़ाने की दिशा में मदद मिल सकती है। इसी प्रक्रिया में हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान के लिए उपलब्ध कराने तथा हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत साझा करने पर भी सहमति बनी थी।
परियोजना से बड़ी मात्रा में कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे उन क्षेत्रों के किसानों को लाभ मिल सकता है जहां खेती के लिए पर्याप्त और नियमित जल उपलब्धता एक चुनौती बनी रहती है। सिंचाई व्यवस्था बेहतर होने से कृषि गतिविधियों को अधिक स्थिरता मिल सकती है। साथ ही जल भंडारण की सुविधा भविष्य में पानी की जरूरतों को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में सहायक हो सकती है। परियोजना से जुड़े राज्यों के लिए कृषि, पेयजल और जल प्रबंधन के स्तर पर इसके अलग-अलग लाभ निर्धारित किए गए हैं।
बढ़ती आबादी और बदलती जल जरूरतों के बीच जल संसाधनों का संरक्षण और उनका संतुलित उपयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किशाऊ परियोजना के माध्यम से जल भंडारण क्षमता विकसित होने से संबंधित क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने की उम्मीद है। विशेष रूप से दिल्ली सहित यमुना बेसिन से जुड़े क्षेत्रों के लिए परियोजना का महत्व बताया गया है। परियोजना पूरी होने के बाद उपलब्ध जल का इस्तेमाल निर्धारित हिस्सेदारी और तय व्यवस्थाओं के अनुसार किया जाएगा।
किशाऊ परियोजना पर हुआ समझौता छह राज्यों के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद सामने आया है। विभिन्न राज्यों की जल, बिजली और वित्तीय हिस्सेदारी से जुड़े विषयों पर सहमति बनने के बाद अब परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ने की स्थिति में है। 15 सितंबर 2026 को हुए समझौते में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे।
किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने का असर जल प्रबंधन के साथ कृषि और ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ने की उम्मीद है। सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से कृषि भूमि को लाभ मिल सकता है, जबकि प्रस्तावित बिजली उत्पादन से ऊर्जा क्षेत्र में भी योगदान की संभावना है। परियोजना के पूरा होने में अभी निर्माण और अन्य निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी होनी हैं। इसलिए इसके वास्तविक लाभ परियोजना के निर्माण और संचालन के बाद ही स्पष्ट रूप से सामने आएंगे। फिलहाल छह राज्यों के बीच समझौते के बाद लंबे समय से लंबित परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।
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