Drilburi Parikrama: लाहौल-स्पीति में दो महिलाओं की मौत

Post by : Himachal Bureau

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में गुरुवार को मौसम ने धार्मिक यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए अचानक मुश्किल हालात पैदा कर दिए। केलांग के पास स्थित पवित्र ड्रिलबुरी पर्वत की परिक्रमा के दौरान अचानक तेज बर्फबारी शुरू हो गई। ऊंचाई वाले इलाके में मौसम तेजी से बिगड़ने के बाद रास्तों पर बर्फ जम गई और फिसलन बढ़ गई। इस दौरान दो महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य श्रद्धालु घायल या बीमार पड़ गए। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। खराब मौसम और कठिन पहाड़ी रास्तों के कारण परिक्रमा कर रहे लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना बचाव दल के लिए भी चुनौतीपूर्ण रहा। स्थानीय पुलिस, प्रशासन और आसपास के लोगों ने मिलकर राहत और बचाव अभियान चलाया। फंसे हुए श्रद्धालुओं को धीरे-धीरे सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया और जिन लोगों की तबीयत बिगड़ी, उन्हें उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल केलांग भेजा गया।

अचानक बदला मौसम और बढ़ी मुश्किल

रिपोर्टों के अनुसार, श्रद्धालु सुबह के समय ड्रिलबुरी पर्वत की धार्मिक परिक्रमा के लिए निकले थे। बताया गया है कि करीब 4:30 से 5 बजे के बीच मौसम में अचानक बड़ा बदलाव आया और तेज बर्फबारी शुरू हो गई। कुछ ही समय में ऊंचाई वाले रास्तों पर बर्फ की परत जमने लगी। इससे पहले से कठिन और पथरीले मार्ग पर फिसलन काफी बढ़ गई। बर्फबारी के साथ तापमान में भी गिरावट आई। ऊंचाई अधिक होने के कारण श्रद्धालुओं को ठंड और सांस से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों के बर्फ पर फिसलकर गिरने की भी जानकारी सामने आई। प्रशासन और स्थानीय लोगों ने ऐसे श्रद्धालुओं को निकालने का प्रयास किया, जिन्हें मौसम बिगड़ने के बाद आगे बढ़ने में परेशानी हो रही थी।

दो महिला श्रद्धालुओं की गई जान

इस हादसे में दो महिला श्रद्धालुओं की मौत हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मृतकों में 74 वर्षीय दावा डोमा भूटिया, जो पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग की रहने वाली थीं, और 61 वर्षीय यांगजिन, जो केलांग क्षेत्र की निवासी थीं, शामिल हैं। प्रारंभिक जानकारी में अत्यधिक ठंड, ऊंचाई और कम ऑक्सीजन के साथ बर्फ पर फिसलने जैसी परिस्थितियों को हादसे से जोड़ा गया है। हालांकि मौत के अंतिम कारणों को लेकर आधिकारिक चिकित्सकीय जांच और अन्य प्रक्रियाओं के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

कई श्रद्धालु घायल, केलांग अस्पताल में उपचार

घटना के बाद घायल और बीमार श्रद्धालुओं को क्षेत्रीय अस्पताल केलांग पहुंचाया गया। रिपोर्टों में कम से कम 11 लोगों के घायल या बीमार होने की जानकारी सामने आई है, जबकि कुछ स्थानीय रिपोर्टों में इससे अधिक लोगों के प्रभावित होने की बात कही गई है। बचाव अभियान के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचाया गया। अस्पताल में पहुंचाए गए लोगों में बुजुर्ग और अन्य श्रद्धालु भी शामिल बताए गए हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्र में अचानक मौसम खराब होने के कारण ठंड से शरीर का तापमान कम होने और ऊंचाई से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ गया था। चिकित्सकीय टीम ने प्रभावित लोगों को उपचार उपलब्ध कराया।

करीब 4400 मीटर की ऊंचाई पर होती है परिक्रमा

ड्रिलबुरी पर्वत के आसपास होने वाली धार्मिक परिक्रमा को तिब्बती बौद्ध परंपरा में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। इसे कोरा के नाम से भी जाना जाता है। यह यात्रा सामान्य मैदानी धार्मिक यात्राओं से अलग है, क्योंकि श्रद्धालुओं को बेहद ऊंचाई वाले कठिन पहाड़ी रास्तों से गुजरना पड़ता है। रिपोर्टों के अनुसार ड्रिलबुरी पर्वत की परिक्रमा लगभग 4400 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्र में होती है। इतनी ऊंचाई पर मौसम सामान्य क्षेत्रों की तुलना में तेजी से बदल सकता है। यही वजह है कि अचानक बर्फबारी, तेज ठंड, कम दृश्यता और फिसलन जैसी परिस्थितियां यात्रा को मुश्किल बना देती हैं।

बचाव अभियान में पुलिस और स्थानीय लोगों की भूमिका

मौसम बिगड़ने की जानकारी मिलते ही पुलिस, प्रशासन और स्थानीय लोगों ने बचाव कार्य शुरू किया। बर्फ से प्रभावित रास्तों पर फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने की कोशिश की गई। कई लोगों को नीचे लाकर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। इस घटना ने एक बार फिर ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में धार्मिक यात्राओं के दौरान मौसम की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को सामने रखा है। खासकर बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए अचानक होने वाला मौसम परिवर्तन गंभीर चुनौती बन सकता है।

Sept. 18, 2026 6:26 p.m. 103
#हिमाचल प्रदेश #ब्रेकिंग न्यूज़ #ताज़ा खबरें #भारत समाचार
देखें खास वीडियो
प्रायोजित
ट्रेंडिंग खबरें
मोनिका ठाकुर ने CSIR NET JRF में हासिल की ऑल इंडिया 65वीं रैंक, सराज का नाम किया रोशन 1 सितंबर 1972 को कांगड़ा से अलग बना था हमीरपुर जिला, जानें इतिहास बिजली महादेव मंदिर में चला सफाई अभियान, 2 क्विंटल प्लास्टिक कचरा हटाया हिमाचल में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज