बद्दी शिवालिक प्लांट पर Health और Water की जांच

Author : Sourabh Jain

बद्दी और नालागढ़ क्षेत्र में स्थित शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर ग्रामीणों की ओर से लंबे समय से उठाई जा रही स्वास्थ्य, पेयजल, प्रदूषण और दुर्गंध से जुड़ी चिंताओं पर अब जिला प्रशासन ने गंभीर रुख अपनाया है। सोलन के उपायुक्त मनमोहन शर्मा की अध्यक्षता में ग्रामीणों, कंपनी प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय लोगों की समस्याओं को विस्तार से सुना गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपों या आशंकाओं के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय वैज्ञानिक जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाएगा। यदि जांच में कंपनी की गतिविधियों से प्रदूषण या स्वास्थ्य संबंधी खतरा सामने आता है, तो नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य जांच से सामने आएगी असली स्थिति

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसला क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराने को लेकर लिया गया। प्रशासन ने माजरा और आसपास के गांवों में स्वास्थ्य सर्वेक्षण करवाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए विशेषज्ञों की मदद लेने की बात कही गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच के लिए आईजीएमसी शिमला के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के साथ समन्वय किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि स्थानीय लोगों द्वारा बताई जा रही स्वास्थ्य समस्याओं के पीछे कोई पर्यावरणीय कारण है या नहीं। इस कदम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ग्रामीण लंबे समय से प्लांट के आसपास के वातावरण को लेकर अपनी चिंताएं प्रशासन के सामने रखते रहे हैं।

पेयजल के नमूनों की होगी वैज्ञानिक जांच

प्रशासन ने केवल स्वास्थ्य जांच तक मामला सीमित नहीं रखा है। आसपास के गांवों में पेयजल गुणवत्ता की जांच के लिए पानी के नमूने लेने के निर्देश भी दिए गए हैं। इन नमूनों की जांच में टीडीएस, क्लोराइड, भारी धातुओं, आर्सेनिक और अन्य संभावित प्रदूषक तत्वों की मौजूदगी का पता लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्षेत्र के लोगों को मिलने वाला पानी सुरक्षित है या नहीं। यदि किसी स्रोत में निर्धारित सीमा से अधिक प्रदूषक तत्व पाए जाते हैं, तो उसके कारणों का पता लगाने और सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता होगी।

वायु और पर्यावरण की स्थिति पर भी नजर

ग्रामीणों की चिंताओं में केवल पानी ही नहीं, बल्कि आसपास के वातावरण और हवा की गुणवत्ता भी शामिल है। इसी कारण प्रशासन ने क्षेत्र में पर्यावरण जांच को भी प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर स्थिति का आकलन किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्लांट की गतिविधियों का आसपास के वातावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है या नहीं। सोलन प्रशासन ने कहा है कि जांच के परिणाम सामने आने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

विधायक हरदीप सिंह बाबा ने रखी ग्रामीणों की बात

नालागढ़ विधायक हरदीप सिंह बाबा भी बैठक में मौजूद रहे। उन्होंने ग्रामीणों की स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी चिंताओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की मांग की। विधायक ने सुझाव दिया कि यदि तकनीकी और कानूनी रूप से संभव हो तो प्लांट में तरल और अर्ध-तरल कचरा लाने से बचा जाए और केवल सूखे ठोस कचरे के परिवहन पर जोर दिया जाए। उनका कहना था कि ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवालों का समाधान निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से होना चाहिए। हाल में विधानसभा में भी विधायक ने प्लांट के संचालन, प्रदूषण और आसपास के लोगों की समस्याओं का मुद्दा उठाया था।

वाहनों की आवाजाही का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा

बैठक में कंपनी प्रबंधन को कचरा लेकर आने वाले वाहनों की आवाजाही का पूरा रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए। वाहन कब प्लांट में प्रवेश करता है, किस प्रकार का कचरा लेकर आता है और कब बाहर निकलता है, इसकी जानकारी दर्ज करने पर जोर दिया गया है। इससे भविष्य में किसी भी शिकायत या जांच की स्थिति में कचरे के परिवहन और वाहनों की आवाजाही का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। प्रशासन की ओर से यह कदम निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दूषित पानी खुले में छोड़ने पर रोक

कंपनी प्रबंधन को अपशिष्ट जल की उचित निकासी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि दूषित पानी को खुले में नहीं छोड़ा जाना चाहिए। अपशिष्ट जल का सही तरीके से प्रबंधन और सुरक्षित निकासी पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए प्रशासन ने इस व्यवस्था की निगरानी पर भी जोर दिया है। यदि किसी स्थान पर पानी के प्रदूषण की शिकायत सामने आती है, तो नमूनों की जांच के आधार पर उसकी वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकेगा।

दुर्गंध की समस्या पर भी स्थायी समाधान की मांग

बैठक में किण्विन कंपनी से जुड़े प्रदूषण और दुर्गंध के मामले पर भी चर्चा हुई। प्रशासन ने कंपनी प्रबंधन से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने को कहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक रहने वाली दुर्गंध लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रशासन ने केवल अस्थायी उपायों के बजाय समस्या की जड़ तक पहुंचकर स्थायी समाधान तलाशने पर जोर दिया है।

ग्रामीणों की शिकायतों का वैज्ञानिक समाधान जरूरी

प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में उठ रही शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि, किसी भी समस्या के वास्तविक कारण की पुष्टि वैज्ञानिक जांच के बाद ही की जा सकती है। इसी वजह से स्वास्थ्य, पानी और पर्यावरण से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जांच कराने का निर्णय लिया गया है। इससे प्रशासन के पास ठोस आंकड़े उपलब्ध होंगे और भविष्य की कार्रवाई को अधिक स्पष्ट आधार मिल सकेगा। यदि जांच में किसी प्रकार की कमी या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई करने का संकेत दिया है।

प्लांट को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले भी विरोध और शिकायतें सामने आती रही हैं। अगस्त 2026 में नालागढ़ विधायक ने विधानसभा में प्लांट से जुड़े प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को उठाते हुए इसके संचालन की अवधि और भविष्य को लेकर भी सवाल रखे थे। मई 2026 में इस मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई थी। अदालत ने प्लांट का संचालन वैज्ञानिक मानकों के अनुसार सुनिश्चित करने और स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए थे।

Sept. 7, 2026 5:15 p.m. 333
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