Post by : Himachal Bureau
दौलतपुर चौक/गगरेट: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के गगरेट उपमंडल के डंगोह खास गांव से एक दुखद खबर सामने आई है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने और रोजगार की तलाश में करीब 10 महीने पहले रूस गए 42 वर्षीय याकूब मोहम्मद की हृदयाघात से मौत हो गई। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया है, जबकि पूरे गांव में शोक का माहौल है।
याकूब मोहम्मद डंगोह खास गांव के वार्ड नंबर-2 के निवासी थे। वह सेवानिवृत्त होमगार्ड गुलाम मोहम्मद के बेटे थे। बताया गया है कि याकूब करीब 10 महीने पहले रोजगार के लिए रूस गए थे। उनका उद्देश्य परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और अपने परिजनों को बेहतर भविष्य देना था। परिवार को उनसे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन विदेश से आई उनकी मौत की खबर ने इन उम्मीदों को गहरे दुख में बदल दिया।
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परिवार के सदस्य शेर खां ने याकूब मोहम्मद की मौत की पुष्टि की है। परिजनों को मिली जानकारी के अनुसार, रूस में हृदयाघात के कारण उनकी मौत हुई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उनकी मौत की परिस्थितियों और घटना के समय को लेकर विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है। याकूब की अचानक मौत से परिवार को गहरा सदमा लगा है। जिस व्यक्ति के बेहतर भविष्य के लिए परिवार ने उम्मीदें संजो रखी थीं, उसके इस तरह दुनिया से चले जाने से परिजन दुख में डूबे हुए हैं।
याकूब मोहम्मद अपने पीछे पत्नी जायफा और बेटी सानिया को छोड़ गए हैं। पति और पिता को खोने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इस मुश्किल समय में परिजनों के सामने भावनात्मक पीड़ा के साथ-साथ आगे की जिंदगी से जुड़ी चुनौतियां भी हैं। डंगोह खास गांव में भी इस घटना को लेकर शोक का माहौल है। गांव के लोग परिवार के दुख में शामिल हैं और इस कठिन समय में उनके प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
परिवार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती याकूब मोहम्मद के पार्थिव शरीर को रूस से भारत लाने की है। परिजनों के अनुसार, वे शव को स्वदेश लाने के लिए अपने स्तर पर लगातार प्रयास कर रहे हैं। विदेश से पार्थिव शरीर वापस लाने की प्रक्रिया में जरूरी दस्तावेजों और कानूनी औपचारिकताओं के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में पार्थिव शरीर भारत कब पहुंचेगा, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। परिवार अपने प्रियजन के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहा है। रोजगार और परिवार के बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर विदेश गए याकूब मोहम्मद की मौत ने उनके परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। अब परिजनों की प्राथमिकता उनके पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाना है, ताकि अंतिम विदाई दी जा सके।
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