हिमाचल प्रदेश में मानसून कमजोर, कई जिलों में सामान्य से कम बारिश की संभावना
हिमाचल प्रदेश में मानसून कमजोर, कई जिलों में सामान्य से कम बारिश की संभावना

Post by : Himachal Bureau

April 16, 2026 10:20 a.m. 133

हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून को लेकर मौसम विभाग ने एक महत्वपूर्ण अनुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार, इस बार राज्य के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। 1 जून से 30 सितंबर तक चलने वाले मानसून सीजन में वर्षा कमजोर रह सकती है, जिसका असर खेती, जल स्रोतों और आम जीवन पर पड़ सकता है। इस खबर से किसानों और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को प्रदेश के मैदानी और निचले पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम शुष्क बना रहेगा। वहीं, मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। ऊंचे पर्वतीय इलाकों में कुछ जगहों पर हल्की बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना भी जताई गई है। यह मौसम बदलाव धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में असर दिखा सकता है।

शिमला स्थित मौसम केंद्र के वैज्ञानिक शोभित कटारिया ने बताया कि लाहौल-स्पीति जिले में इस बार सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। इसके अलावा हमीरपुर, किन्नौर और चंबा जिलों में सामान्य बारिश की उम्मीद है। लेकिन राज्य के बाकी हिस्सों में मानसून कमजोर रहने का अनुमान है, जिससे कुल मिलाकर बारिश कम हो सकती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार एल नीनो जैसी जलवायु परिस्थितियों का प्रभाव भी देखने को मिल सकता है, जिससे मानसून कमजोर हो जाता है। इस स्थिति में समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है और हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इसका सीधा असर वर्षा पर पड़ता है। हालांकि, कुछ अन्य जलवायु कारकों में सकारात्मक बदलाव के कारण मानसून के अंत में थोड़ी राहत मिलने की संभावना भी जताई गई है।

इस साल जनवरी, फरवरी और मार्च के महीनों में भी हिमाचल में बर्फबारी कम हुई है। इसका असर आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता पर पड़ सकता है। कम बर्फबारी के कारण नदियों और जल स्रोतों में पानी कम हो सकता है, जिससे गर्मी के मौसम में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पिछले 20 वर्षों के आंकड़ों को देखें तो हिमाचल प्रदेश में अधिकतर सालों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। केवल कुछ सालों में ही अधिक वर्षा हुई है, लेकिन उन वर्षों में प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं भी बढ़ी थीं। इससे यह साफ होता है कि ज्यादा बारिश भी कई बार नुकसान का कारण बनती है।

ताजा मौसम की स्थिति की बात करें तो केलोंग में रात का न्यूनतम तापमान 1.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि ऊना में दिन का अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस रहा। शुक्रवार के लिए चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिलों में तेज हवाओं, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है।

मौसम विभाग ने यह भी बताया कि गुरुवार रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिससे आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। शनिवार और रविवार को भी कुछ इलाकों में तेज हवाएं और आंधी-तूफान की संभावना बनी हुई है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और मौसम से जुड़ी जानकारी पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।

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