शिमला के शौर्य ने बिना कोचिंग पहले प्रयास में जेईई एडवांस्ड किया पास
शिमला के शौर्य ने बिना कोचिंग पहले प्रयास में जेईई एडवांस्ड किया पास

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

Aug. 7, 2026 10:50 a.m. 147

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के एक होनहार छात्र ने अपनी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। शिमला के शौर्य सिंह भवानी ने देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में गिनी जाने वाली JEE Advanced को पहले ही प्रयास में सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर IIT Mandi में बायोइंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त किया है। सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने किसी भी नियमित कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया और पूरी तैयारी स्वयं के अध्ययन तथा नियमित अभ्यास के माध्यम से की। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि पूरे शिमला और हिमाचल प्रदेश में खुशी का माहौल है। शिक्षकों, रिश्तेदारों और परिचितों ने शौर्य को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनकी मेहनत की सराहना की है।

चार राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में दर्ज की सफलता

शौर्य की सफलता केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रही। उन्होंने NEET UG, JEE Advanced, CUET UG, और IISER Aptitude Test जैसी चार प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में सफलता हासिल की। इन परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद उनके पास देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश के अवसर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपनी रुचि और भविष्य की योजना को ध्यान में रखते हुए आईआईटी मंडी के बायोइंजीनियरिंग कार्यक्रम को चुना। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कठिन परीक्षाओं में एक साथ सफलता हासिल करना किसी भी विद्यार्थी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

बिना कोचिंग बनाई सफलता की राह

शौर्य का कहना है कि उन्होंने कभी भी सफलता के लिए किसी शॉर्टकट पर भरोसा नहीं किया। उनकी तैयारी का आधार नियमित पढ़ाई, समय का सही प्रबंधन और प्रत्येक विषय की गहरी समझ रहा। उन्होंने रोजाना निर्धारित लक्ष्य तय कर उसी के अनुसार अध्ययन किया। उनका मानना है कि परीक्षा की तैयारी के दौरान परिणाम के बारे में अधिक सोचने के बजाय अपनी मेहनत पर ध्यान देना चाहिए। यदि विद्यार्थी पूरे मन से लगातार पढ़ाई करता है तो सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच और निरंतर अभ्यास ने उन्हें हर चुनौती का सामना करने का आत्मविश्वास दिया।

परिवार ने हर कदम पर किया प्रोत्साहित

शौर्य के पिता डॉ. मोहिंदर सिंह भवानी ने बताया कि उनका बेटा बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहा है। उसने शिमला के डीएवी पब्लिक स्कूल, लक्कड़ बाजार से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और हर कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ माध्यमिक कक्षा में शौर्य ने मेडिकल और नॉन मेडिकल दोनों विषयों का अध्ययन किया, जिससे उसे विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिली। परिवार ने हमेशा उसकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और कभी किसी प्रकार का अनावश्यक दबाव नहीं बनाया।

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विद्यार्थियों के लिए बनी प्रेरणा

शौर्य सिंह भवानी की सफलता उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो यह मानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता केवल महंगी कोचिंग से ही संभव होती है। उन्होंने अपने प्रयासों से साबित किया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदारी से की जाए और आत्मविश्वास बनाए रखा जाए तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि विद्यार्थियों को दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। नियमित अभ्यास, सही रणनीति और धैर्य किसी भी कठिन परीक्षा में सफलता की सबसे मजबूत नींव होते हैं। शौर्य की उपलब्धि आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश के अनेक विद्यार्थियों को नए सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी।

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