Post by : Himachal Bureau
केंद्रीय बजट 2026–27 को लेकर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बजट में हिमाचल जैसे छोटे और पहाड़ी राज्यों की जरूरतों को नजरअंदाज किया गया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि यह बजट राज्य के हितों के अनुरूप नहीं है और इससे आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
सीएम सुक्खू ने विशेष रूप से 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद किए जाने के फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि RDG बंद करना हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए गंभीर झटका है, क्योंकि ऐसे राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के कारण राजस्व जुटाना पहले से ही चुनौतीपूर्ण होता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र से लोन सीमा को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने की मांग की थी, लेकिन इस मांग को भी अनदेखा कर दिया गया। उनका मानना है कि लोन सीमा बढ़ने से राज्य विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा सकता था और जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकती थीं।
सुक्खू ने बजट को जन-विरोधी, किसान-विरोधी और हिमाचल-विरोधी करार देते हुए कहा कि राज्य सरकार अपने अधिकारों और जनता के हितों के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल के किसानों, कर्मचारियों और आम लोगों पर इस बजट का असर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि पहाड़ी राज्यों की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि अगर छोटे राज्यों की आर्थिक जरूरतों को नजरअंदाज किया गया, तो इससे संघीय ढांचे पर भी असर पड़ सकता है।
अब यह मुद्दा राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से चर्चा का विषय बन गया है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर राज्य की वित्तीय स्थिति और विकास योजनाओं पर पड़ सकता है। वहीं, इस मामले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज होने की संभावना है।
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