Author : Gopal Dutt Sharma
सिरमौर जिले की उप तहसील पझौता के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत जदोल-टपरोली के सरकारी विद्यालय इन दिनों शिक्षकों और कर्मचारियों की गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं। लंबे समय से कई महत्वपूर्ण पद रिक्त होने के कारण विद्यालयों की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते रिक्त पद नहीं भरे गए तो इसका सबसे अधिक नुकसान ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उठाना पड़ेगा। सरकारी स्कूलों में बढ़ती स्टाफ की कमी अब शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बन चुकी है।
जानकारी के अनुसार विद्यालयों में प्रधानाचार्य, विभिन्न विषयों के प्रवक्ता, शारीरिक शिक्षा शिक्षक तथा कार्यालयी कर्मचारियों सहित कई पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। ऐसे में उपलब्ध शिक्षकों को अपने विषयों के अलावा अन्य विषय भी पढ़ाने पड़ रहे हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक कार्यों का दायित्व भी उन्हीं के कंधों पर आ गया है। एक शिक्षक को एक साथ कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना कठिन होता जा रहा है। शिक्षक भर्ती में देरी का असर सीधे विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर दिखाई दे रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र के अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को प्रत्येक विषय का विशेषज्ञ शिक्षक नहीं मिल पा रहा है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग से कई बार रिक्त पद भरने की मांग की जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। विद्यालयों में सीमित संसाधनों और कम स्टाफ के बावजूद शिक्षक पूरी मेहनत से विद्यार्थियों को पढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन लगातार बढ़ते कार्यभार के कारण व्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
पंचायत प्रतिनिधियों, अभिभावकों और समाजसेवियों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जल्द से जल्द सभी रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी बेहतर शिक्षा का समान अवसर मिलना चाहिए। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराया गया तो विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा और विद्यार्थियों का भविष्य अधिक सुरक्षित बन सकेगा। विद्यार्थी बेहतर शिक्षा पाने के अधिकारी हैं और उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं मिलनी चाहिए।
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी भी विद्यालय की गुणवत्ता केवल भवनों और सुविधाओं से नहीं, बल्कि योग्य शिक्षकों और पर्याप्त कर्मचारियों से तय होती है। यदि विद्यालयों में समय पर नियुक्तियां होती हैं तो विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकेगी। मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग से अब स्थानीय लोगों को जल्द सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है।
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