Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्मार्ट मीटर को लेकर स्थानीय निवासियों में नाराज़गी और चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग बिना उनकी सहमति के घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम कर रहा है। इससे न केवल उनकी निजता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि बिजली के बिल में अचानक वृद्धि और आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका भी पैदा हो गई है।
स्थानीय लोगों ने कहा कि स्मार्ट मीटर का उद्देश्य बिजली की खपत को ऑनलाइन मॉनिटर करना और बिलिंग प्रक्रिया को आसान बनाना है, लेकिन बिना जानकारी और सहमति के इसकी स्थापना करने से जनता में डर और असंतोष फैल गया है। कई निवासियों का कहना है कि उनके बिजली बिल अचानक बढ़ गए हैं, और इसे स्मार्ट मीटर से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके कारण आम जनता में विभाग के प्रति विश्वास कम हो रहा है।
विरोध जताते हुए कई स्थानीय निवासियों ने विभाग और प्रशासन से मांग की है कि वे तुरंत इस प्रक्रिया को रोकें और लोगों की सहमति के बिना कोई स्मार्ट मीटर न लगाया जाए। उनका कहना है कि पहले जनता को पूरी जानकारी दी जाए, समझाया जाए और उनकी सहमति प्राप्त की जाए। कई निवासियों ने चेतावनी भी दी कि यदि उनकी बात नहीं मानी गई, तो वे सार्वजनिक रूप से विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट मीटर तकनीक में पारदर्शिता और जानकारी का अभाव अक्सर लोगों में डर और संदेह पैदा कर देता है। इसलिए विभाग को चाहिए कि वे लोगों को तकनीक, बिलिंग प्रक्रिया और संभावित लाभ-हानियों के बारे में पूरी जानकारी दें, ताकि जनता में विश्वास बना रहे।
हमीरपुर के कई क्षेत्रों में यह मुद्दा तेजी से फैल रहा है, और लोग सोशल मीडिया और स्थानीय मंचों के माध्यम से अपने विरोध को उजागर कर रहे हैं। नागरिकों ने कहा कि स्मार्ट मीटर को लागू करना ठीक है, लेकिन इसे लागू करने से पहले उनकी सहमति और सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
स्थानीय प्रशासन ने अब तक इस मामले पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जनता की चिंता और शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। आने वाले दिनों में विभाग को जनता से संवाद स्थापित करने और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए कदम उठाने की संभावना जताई जा रही है।
इस तरह हमीरपुर में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर जनता और विभाग के बीच पैदा हुई यह स्थिति यह स्पष्ट करती है कि नई तकनीक को लागू करने से पहले लोगों की जानकारी, सहमति और विश्वास सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है। बिजली विभाग के लिए यह चुनौती बन गई है कि वह जनता को आश्वस्त करे कि Smart Meter के माध्यम से उनकी खपत और बिलिंग प्रक्रिया केवल पारदर्शी और लाभकारी होगी, और इससे किसी भी नागरिक पर अनावश्यक आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा।
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