Post by : Shivani Kumari
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश में किरतपुर-मनाली राजमार्ग के किनारे अवैध खनन पर सख्त प्रतिबंध लगाया है। एनजीटी ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि बिना अनुमति किसी भी निजी भूमि पर खनन या खुदाई की अनुमति नहीं दी जाएगी। अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने और नियमित निगरानी बढ़ाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
किरतपुर-मनाली राजमार्ग हिमाचल प्रदेश का एक प्रमुख मार्ग है, जो मंडी, बिलासपुर और कुल्लू जिलों से होकर गुजरता है। पिछले कुछ वर्षों में व्यावसायिक निर्माण कार्यों के लिए अवैध खुदाई में वृद्धि हुई है, जिसके चलते भूस्खलन की घटनाएँ भी बढ़ी हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (HPSDMA) के अनुसार, इस वर्ष जून से अगस्त के बीच इस राजमार्ग पर 22 भूस्खलन हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान पहाड़ी ढलानों की अत्यधिक कटाई से मिट्टी अस्थिर हो गई है। वरिष्ठ पारिस्थितिकीविद् डॉ. आर. के. शर्मा ने कहा, “हिमालय जैसी संवेदनशील जगह पर अनियंत्रित खनन बेहद खतरनाक है। एनजीटी का यह आदेश सही दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए निरंतर निगरानी आवश्यक है।”
एनजीटी ने अधिकारियों को उपग्रह निगरानी और नियमित निरीक्षण का उपयोग कर अवैध खनन पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इससे न केवल सड़कें सुरक्षित होंगी बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान से बचाया जा सकेगा। स्थानीय लोग इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर #SaveHimachal ट्रेंड कर रहा है। सर्वेक्षणों के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत लोग एनजीटी के निर्णय का समर्थन कर रहे हैं।
अवैध खनन पर रोक से लगभग 5,000 लोगों की नौकरियाँ प्रभावित होंगी। राज्य सरकार ने इन लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार और प्रशिक्षण की योजना बनाई है। स्थानीय लोगों को पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण अभियानों में शामिल किया जाएगा। सुरक्षित सड़कों से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे आने वाले वर्षों में राज्य की पर्यटन आय में 10–15 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है।
एनजीटी का यह आदेश दर्शाता है कि कानून और जनसहभागिता मिलकर पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं। भविष्य में खनन और निर्माण कार्यों को सख्त नियमों, नियमित निगरानी और सरकार-जन सहयोग के आधार पर संचालित किया जाएगा। इसके लिए लगभग ₹300 करोड़ का निवेश वृक्षारोपण, ढलान सुदृढ़ीकरण और स्थानीय समुदाय की सुरक्षा पर किया जाएगा।
यह कदम हिमाचल प्रदेश के लिए एक संदेश है कि सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को संतुलित रूप से आगे बढ़ाया जा सकता है। एनजीटी का यह आदेश हिमालयी क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए एक मिसाल बन सकता है।
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