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हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (हिमफेड) ने दूध खरीद व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। बढ़ती खरीद और सीमित प्रसंस्करण क्षमता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए हिमफेड ने फिलहाल प्रत्येक दुग्ध उत्पादक से प्रतिदिन अधिकतम 20 लीटर दूध खरीदने की सीमा तय कर दी है। यह फैसला अस्थायी तौर पर लागू किया गया है और इसका उद्देश्य मौजूदा संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के साथ अधिक से अधिक किसानों को लाभ पहुंचाना है।
हिमफेड प्रबंधन के अनुसार वर्तमान समय में विभिन्न प्रसंस्करण संयंत्र अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक काम कर रहे हैं। लगातार बढ़ती दूध की आवक के कारण संयंत्रों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जिससे संचालन संबंधी कई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
इन परिस्थितियों में मशीनों की नियमित सफाई और सैनिटाइजेशन के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा दूध भंडारण की सीमित क्षमता, उपकरणों पर बढ़ता दबाव, रखरखाव खर्च में वृद्धि और समय पर मरम्मत कार्यों में आने वाली दिक्कतें भी प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती बन गई हैं।
दूध खरीद को सीमित करने का निर्णय हिमफेड के निदेशक मंडल की बैठक में लिया गया था। प्रबंधन का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में यह कदम आवश्यक है ताकि प्रसंस्करण इकाइयों के संचालन को सुचारू बनाए रखा जा सके और गुणवत्ता मानकों से कोई समझौता न हो।
अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था स्थायी नहीं है और परिस्थितियों में सुधार होने के बाद भविष्य में इस पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
हिमफेड ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय का उद्देश्य अधिक से अधिक छोटे और सीमांत दुग्ध उत्पादकों को लाभ पहुंचाना है। ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी गतिविधियां आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं और सहकारी व्यवस्था के माध्यम से हजारों परिवार इससे जुड़े हुए हैं।
सीमित खरीद व्यवस्था के जरिए दूध की उपलब्ध मात्रा को अधिक उत्पादकों के बीच संतुलित तरीके से वितरित करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सके।
प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान क्षमता सीमाओं के कारण नई पंजीकृत दुग्ध सहकारी समितियों से फिलहाल दूध खरीदना संभव नहीं है। जब तक प्रसंस्करण क्षमता और भंडारण सुविधाओं में सुधार नहीं होता, तब तक नई समितियों को शामिल करने की संभावना कम है।
इस संबंध में मंडी, कांगड़ा, दत्तनगर, नाहन और नालागढ़ इकाइयों के प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी दुग्ध सहकारी समितियों और संबंधित हितधारकों को अगले कुछ दिनों में इस निर्णय की जानकारी दें तथा इसके पीछे के कारणों को स्पष्ट करें।
हिमफेड का यह कदम मौजूदा संसाधनों के बेहतर उपयोग और संचालन व्यवस्था को संतुलित बनाए रखने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। आने वाले समय में परिस्थितियों के अनुसार इस व्यवस्था में बदलाव की संभावना भी बनी रहेगी।
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