हिमाचल में हरित विकास मॉडल को मजबूत बनाने के लिए नॉर्वे के साथ हुई अहम बैठक
हिमाचल में हरित विकास मॉडल को मजबूत बनाने के लिए नॉर्वे के साथ हुई अहम बैठक

Post by : Himachal Bureau

June 9, 2026 5:54 p.m. 119

हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार और नॉर्वे के बीच सहयोग की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। शिमला में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने कई अहम विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। बैठक में विशेष रूप से निर्माण एवं ध्वस्तीकरण से निकलने वाले कचरे के बेहतर प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखते हुए विकास की राह पर आगे बढ़ना चाहता है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक और टिकाऊ तकनीकों को अपनाने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नॉर्वे के पास कचरा प्रबंधन और संसाधनों के पुनः उपयोग के क्षेत्र में व्यापक अनुभव है, जिससे हिमाचल को लाभ मिल सकता है।

बैठक में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए कई संभावित क्षेत्रों पर चर्चा हुई। इनमें संसाधनों का पुनर्चक्रण, पर्यावरण अनुकूल पर्यटन, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने वाली शहरी योजनाएं, स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक प्रशासनिक प्रणालियां शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल और नॉर्वे दोनों प्रकृति संरक्षण को प्राथमिकता देते हैं और इसी साझा सोच के आधार पर भविष्य में बेहतर सहयोग विकसित किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने नॉर्वे की संस्थाओं, विशेषज्ञों और तकनीकी कंपनियों को हिमाचल के साथ मिलकर काम करने का आमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के लिए ऐसे समाधान विकसित किए जाने चाहिए जो लंबे समय तक उपयोगी साबित हों और अन्य पहाड़ी राज्यों व क्षेत्रों में भी लागू किए जा सकें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार नई योजनाओं पर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में बिजली से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि प्रदूषण कम किया जा सके। इसके साथ ही प्रदेश में हरित क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य भी तय किया गया है। सरकार युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को इस अभियान से जोड़कर अधिक पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को आगे बढ़ा रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को भी प्रोत्साहित कर रही है। किसानों को रासायनिक मुक्त खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे खेती की लागत कम हो और भूमि की उर्वरता बनी रहे। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार विभिन्न फसलों और कृषि उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य भी उपलब्ध करा रही है।

बैठक में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने नॉर्वे की कंपनियों को हिमाचल में पर्यटन, स्वच्छ ऊर्जा और भू-तापीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि हिमाचल और नॉर्वे के बीच यह सहयोग भविष्य में जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने और पर्यावरण के अनुकूल विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की साझेदारी से न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि दुनिया के अन्य पर्वतीय क्षेत्रों को भी लाभ मिल सकता है।

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